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AIAPGET QUESTIONS PAPER 2026 PART-4


AYUSHMAN QUIZ
Ayushman Ayurveda Premium Mock Series

AIAPGET - 2026 QUESTION PAPER (SET - 5)

Prashn 71 se 80 | Marking: +4 for Correct, -1 for Wrong (1/4 Negative Marking) | Max: 40

Attempted: 0/10
Correct (+4): 0
Wrong (-1): 0
Live Score: 0 / 40
PRASHN 71
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: गैरिक का सत्त्वपातन आवश्यक नहीं है।
कथन II: उपरोक्त कथन आचार्य नंदी की राय है।
उपरोक्त कथनों के आलोक में, नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(a) कथन I और कथन II दोनों सही हैं
(b) कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
(c) कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
(d) कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
✅ Sahi Uttar: (a) कथन I और कथन II दोनों सही हैं
📖 Sandarbh: रसशास्त्र - उपरस/गैरिक सत्त्वपातन प्रकरण (आचार्य नंदी के मतानुसार गैरिक में सत्त्वपातन की आवश्यकता नहीं मानी गई है)।
PRASHN 72
लौह निरुत्थीकरण के प्रसंस्करण में उपयोग की जाने वाली द्रव्य सामग्री हैं:
(a) गंधक और गैरिक
(b) गंधक और गोघृत
(c) गंधक और गोदुग्ध
(d) गंधक और गोमूत्र
✅ Sahi Uttar: (b) गंधक और गोघृत
📖 Sandarbh: रसतरंगिणी / आयुर्वेद प्रकाश - लौह भस्म निरुत्थीकरण परीक्षा एवं प्रसंस्करण विधि।
PRASHN 73
रस तरंगिणी के अनुसार अँगार कोष्ठी की ऊँचाई कितनी रहनी चाहिए?
(a) 1 नृप हस्त
(b) 2 नृप हस्त
(c) 1 अरत्नि
(d) 2 वितस्ति
✅ Sahi Uttar: (a) 1 नृप हस्त
📖 Sandarbh: रसतरंगिणी, तृतीय तरंग - कोष्ठी यंत्र निर्माण मान।
PRASHN 74
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: कच्छप यंत्र का प्रयोग गंधक जारण के लिए होता है।
कथन II: कच्छप यंत्र को रस तरंगिणी कार ने कूर्म यंत्र भी कहा है।
उपरोक्त कथनों को ध्यान में रखते हुए, नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर चुनें:
(a) कथन I और कथन II दोनों ही सत्य हैं।
(b) कथन I और कथन II दोनों ही गलत हैं।
(c) कथन I सत्य है लेकिन कथन II गलत है
(d) कथन I गलत है लेकिन कथन II सत्य है
✅ Sahi Uttar: (a) कथन I और कथन II दोनों ही सत्य हैं।
📖 Sandarbh: रसतरंगिणी / रसरत्नसमुच्चय - यंत्र विज्ञान (कच्छप/कूर्म यंत्र का मुख्य उपयोग गंधक जारण हेतु निर्दिष्ट है)।
PRASHN 75
निम्नलिखित में से कौन से द्रव्य शीत वीर्य हैं:
A. लताकस्तूरी | B. बकुल | C. मुस्ता | D. तिन्तिडीक | E. शतपुष्पा
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(a) केवल A, B, C
(b) केवल B, C, D
(c) केवल D, E
(d) केवल A, C
✅ Sahi Uttar: (a) केवल A, B, C (लताकस्तूरी, बकुल एवं मुस्ता शीत वीर्य द्रव्य हैं; तिन्तिडीक एवं शतपुष्पा उष्ण वीर्य हैं)।
📖 Sandarbh: भावप्रकाश निघण्टु - द्रव्य वीर्य निरूपण।
PRASHN 76
सुमेलित कीजिए (द्रव्य नाम एवं पर्याय नाम):
सूची-I (द्रव्य नाम)सूची-II (पर्याय नाम)
A. कुटजI. महावल्कल
B. कोकिलाक्षII. कलिंग
C. कट्फलIII. स्थूलवल्कल
D. लोध्रIV. तालमखाना
(a) A-II, B-IV, C-I, D-III
(b) A-II, B-IV, C-III, D-I
(c) A-I, B-IV, C-II, D-III
(d) A-IV, B-II, C-I, D-III
✅ Sahi Uttar: (a) A-II, B-IV, C-I, D-III
📖 Sandarbh: द्रव्यगुण विज्ञान - कुटज (कलिंग), कोकिलाक्ष (तालमखाना), कट्फल (महावल्कल), लोध्र (स्थूलवल्कल)।
PRASHN 77
सुमेलित कीजिए (द्रव्य एवं उनके गण):
सूची-I (घटक द्रव्य)सूची-II (गण/वर्ग)
A. अतिविषाI. चतुर्बीज
B. यवानीII. चतुरूषण
C. तेजपत्रIII. चतुर्भद्र
D. पिप्पलीमूलIV. चतुर्जातक
(a) A-I, B-II, C-IV, D-III
(b) A-I, B-IV, C-II, D-III
(c) A-III, B-I, C-II, D-IV
(d) A-III, B-I, C-IV, D-II
✅ Sahi Uttar: (d) A-III, B-I, C-IV, D-II
📖 Sandarbh: शार्ङ्गधर संहिता (अतिविषा = चतुर्भद्र, यवानी = चतुर्बीज, तेजपत्र = चतुर्जातक, पिप्पलीमूल = चतुरूषण)।
PRASHN 78
निम्नलिखित में से कौन सा घटक 'स्वल्प त्रिफला' का है:
(a) परूषक
(b) कलिंग फल
(c) पूगफल
(d) जातिफल
✅ Sahi Uttar: (a) परूषक
📖 Sandarbh: भावप्रकाश निघण्टु - स्वल्प त्रिफला घटक (द्राक्षा, काश्मर्य, परूषक)।
PRASHN 79
शारंगधर के अनुसार उदर-रोग में नारायण चूर्ण का अनुपान क्या होना चाहिए?
A. त्रिफला क्वाथ | B. अजमोदा | C. दाड़िम रस | D. ऊँटनी का दूध | E. गाय के दूध से बना तक्र
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(a) केवल A, B, C
(b) केवल B, C, D
(c) केवल D, E
(d) केवल A, C
✅ Sahi Uttar: (c) केवल D, E (उष्ट्री क्षीर एवं गोतक्र उदर रोग में नारायण चूर्ण का अनुपान निर्दिष्ट है)।
📖 Sandarbh: शार्ङ्गधर संहिता, मध्यम खण्ड अध्याय 6 (नारायण चूर्ण अनुपान विधान)।
PRASHN 80
शारंगधर संहिता के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-कौन सी कल्पना पिपासा और ज्वर की चिकित्सा में प्रयुज्य है:
(a) खर्जूरादि मंथ और षडंगपानीय
(b) आम्रादि हिम और षडंगपानीय
(c) वाट्य मंड और षडंगपानीय
(d) लाज मंड और षडंगपानीय
✅ Sahi Uttar: (d) लाज मंड और षडंगपानीय
📖 Sandarbh: शार्ङ्गधर संहिता, मध्यम खण्ड - मंड एवं क्वाथ कल्पना (लाज मंड पिपासाघ्न एवं ज्वरनाशक है)।
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