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AIAPGET QUESTION PAPER 2026 PART-3


AYUSHMAN AYURVEDA
Ayushman Ayurveda Premium Mock Series

AIAPGET - 2026 QUESTION PAPER (SET - 3)

Questions 41 to 60 | Marking: +4 for Correct, -1 for Wrong (1/4 Negative Marking) | Max: 80

प्रयास (Attempted): 0/20
सही (+4): 0
गलत (-1): 0
लाइव स्कोर: 0 / 80
QUESTION 41
According to Acharya Sushruta, arrange the formulations used in 'Vranashodhana Ropana' under 'Shashti Upakrama' in sequence:
आचार्य सुश्रुत मतानुसार, 'षष्ठि उपक्रम' के अन्तर्गत 'व्रणशोधन रोपण' में प्रयुक्त कल्पनाओं को क्रमशः व्यवस्थित कीजिए :
A. Taila (तैल) | B. Varti (वर्ति) | C. Avachurnana (अवचूर्णन) | D. Kalka (कल्क) | E. Rasakriya (रसक्रिया)
(a) B, D, A, E, C
(b) D, A, E, C, B
(c) C, E, A, B, D
(d) A, B, C, D, E
✅ सही उत्तर: (a) B, D, A, E, C (वर्ति, कल्क, तैल/सर्पि, रसक्रिया, अवचूर्णन)
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, चिकित्सास्थान अध्याय 1 (षष्टिक उपक्रम वर्णन क्रम)।
QUESTION 42
The use of 'Kuruvinda Anushastra' is indicated for:
'कुरुविन्द अनुशस्त्र' का प्रयोग निर्दिष्ट है :
(a) Lekhana (scraping) / लेखन हेतु
(b) Visravana (drainage) / विस्रावण हेतु
(c) Aharana and Eshana (removal and probing) / आहरण एवं एषण हेतु
(d) Chhedana and Bhedana (incision and puncture) / छेदन एवं भेदन हेतु
✅ सही उत्तर: (d) Chhedana and Bhedana / छेदन एवं भेदन हेतु
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, सूत्रस्थान 8 (अनुशस्त्र प्रयोग विधान)।
QUESTION 43
नीचे दो कथन दिए गए हैं (Statement I & II):
कथन I: कूष्माण्ड का प्रयोग वस्तिशोधक के रूप में होता है।
कथन II: सुश्रुत ने कूष्माण्ड की तीन अवस्थाएं कही हैं- बाल, मध्य, और पक्व और इनके गुण अलग-अलग हैं।
(a) Both Statement I and Statement II are true / कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं
(b) Both Statement I and Statement II are false / कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
(c) Statement I is correct but Statement II is false / कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
(d) Statement I is false but Statement II is true / कथन I गलत है लेकिन कथन II सत्य है
✅ सही उत्तर: (a) कथन I और कथन II दोनों सत्य हैं।
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, सूत्रस्थान अध्याय 46 (शाकवर्ग - कूष्माण्ड गुण वर्णन)।
QUESTION 44
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
A. शौर्यम्-आशुक्रिया सुश्रुत के अनुसार शल्यचिकित्सकों के गुण हैं।
B. सुश्रुत ने गुद प्रदेश के लिए चंद्रमंडल प्रकार के छेद का उल्लेख किया है।
C. सुश्रुत द्वारा मूढगर्भ चिकित्सा में अभुक्त की सलाह दी गई है।
D. सीवनकर्म को सुश्रुत द्वारा अष्टविध शस्त्रकर्म में शामिल नहीं किया गया है।
E. सुश्रुत संहिता में अष्टविध शस्त्रकर्म अध्याय में त्रिविधकर्म का उल्लेख है।
नीचे दिए गए विकल्पों में से सबसे उपयुक्त उत्तर चुनें:
(a) A, B, C only / केवल A, B, C
(b) B, C, D only / केवल B, C, D
(c) A, C only / केवल A, C
(d) B, D only / केवल B, D
✅ सही उत्तर: (c) केवल A, C (A और C सत्य हैं; गुद प्रदेश में अर्धचन्द्र छेद होता है तथा सीवन अष्टविध शस्त्रकर्म में शामिल है)।
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, सूत्रस्थान 5 एवं चिकित्सास्थान 15।
QUESTION 45
Which food item is considered as - "Vraneshu Pathyastilavaccha Nityam"?
कौन सा खाद्य पदार्थ माना जाता है-"व्रणेषु पथ्यस्तिलवच्च नित्यम्"?
(a) Mudga / मुद्ग
(b) Yava / यव
(c) Godhuma / गोधूम
(d) Kodrava / कोद्रव
✅ सही उत्तर: (b) Yava / यव
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, सूत्रस्थान 46/41–42।
QUESTION 46
According to Acharya Sushruta, "Kshiprodgama Kshipravidahapaka Teevra Jwara" is related to which type of Rohini?
आचार्य सुश्रुत के अनुसार "क्षिप्रोद्गमा क्षिप्रविदाहपाका तीव्र ज्वरा" का संबंध किस प्रकार की रोहिणी से है ?
(a) Vataja Rohini / वातज रोहिणी
(b) Pittaja Rohini / पित्तज रोहिणी
(c) Raktaja Rohini / रक्तज रोहिणी
(d) Sannipataja Rohini / सन्निपातज रोहिणी
✅ सही उत्तर: (b) Pittaja Rohini / पित्तज रोहिणी
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, निदानस्थान 16/51 (गलगत रोग - रोहिणी भेद लक्षण)।
QUESTION 47
Which of the following symptoms have been described by Acharya Sushruta in the context of 'Dushta Pratishyaya'?
इनमें से कौन से लक्षण आचार्य सुश्रुत ने 'दुष्ट प्रतिश्याय' के संदर्भ में प्रतिपादित किए हैं ?
A. नासागत रक्तपित्त | B. निःश्वासोच्छ्वासदौर्गन्ध्यं | C. नासिका का कभी क्लेद युक्त व कभी शुष्क होना | D. गंधज्ञाननाश | E. शिरःशूल
(a) A, B and C only / केवल A, B और C
(b) C, D and E only / केवल C, D और E
(c) B, C and D only / केवल B, C और D
(d) B, C and E only / केवल B, C और E
✅ सही उत्तर: (c) केवल B, C और D
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, उत्तरतंत्र 24/14–16 (नासारोग प्रतिश्याय प्रतिषेध)।
QUESTION 48
Acharya Sushruta described the use of "Triphala Tulya Kaseesa Saindhavaishcha Rasakriya" in which eye disease?
आचार्य सुश्रुत ने "त्रिफला तुल्य कासीस सैन्धवैश्च रसक्रिया" का प्रयोग किस नेत्र रोग में वर्णन किया है ?
(a) Lagana / लगण
(b) Upanaha / उपनाह
(c) Krimigranthi / कृमिग्रन्थि
(d) Anjananamika / अञ्जननामिका
✅ सही उत्तर: (c) Krimigranthi / कृमिग्रन्थि
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, उत्तरतंत्र 14/8–9।
QUESTION 49
In Sushruta-described 'Dantaharsha' (tooth sensitivity) disease, the Dosha involved is:
सुश्रुतोक्त 'दन्तहर्ष' रोग में दोष निरूपण है ?
(a) Pure Vataja / शुद्ध वातज
(b) Pure Pittaja / शुद्ध पित्तज
(c) Vata-Kaphaja / वात-कफज
(d) Vata-Pittaja / वात-पित्तज
✅ सही उत्तर: (a) Pure Vataja / शुद्ध वातज
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, निदानस्थान 16/30 ("शीतोष्णं सहते नाति दन्तानां हर्षणोऽनिलात्")।
QUESTION 50
According to Sushruta, the stages of Darvikara Sarpa Visha appear in the sequence:
सुश्रुत के अनुसार दर्वीकर सर्प विष के लक्षण निम्नलिखित क्रम में प्रकट होते हैं:
A. शोणितम् दूषयति, पिपीलिका परिसर्पणमिव | B. तन्द्रा प्रसेक संधि विश्लेष | C. शोफो ग्रन्थयश्च अंगे | D. पर्व भेदो हिक्का दाह | E. दंशक्लेदः शिरो गौरवं
(a) A, C, E, B, D
(b) A, B, D, E, C
(c) A, B, C, D, E
(d) E, C, A, B, D
✅ सही उत्तर: (a) A, C, E, B, D (वेग लक्षण क्रम)
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, कल्पस्थान अध्याय 4/39।
QUESTION 51
According to Acharya Sushruta, 'Angamarda' is a symptom of which of the following?
आचार्य सुश्रुत के अनुसार, 'अंगमर्द' निम्नलिखित में से किसका लक्षण है?
(a) Aartava Vriddhi / आर्तव वृद्धि
(b) Majja Vriddhi / मज्जा वृद्धि
(c) Meda Vriddhi / मेद वृद्धि
(d) Rasa Vriddhi / रस वृद्धि
✅ सही उत्तर: (a) Aartava Vriddhi / आर्तव वृद्धि
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, सूत्रस्थान 15/16 ("आर्तवं वृद्धिमदङ्गमर्दं च दौर्गन्ध्यं च करोति")।
QUESTION 52
"Sharirophachayo Balam Varnah Sthiti Hanishcha" is obtained from which Garbhakara Bhava?
"शरीरोपचयो बलं वर्णः स्थिति हानिश्च" आचार्य सुश्रुत के अनुसार किस गर्भकर भाव से प्राप्त होती है?
(a) Rasaja / रसज भाव
(b) Aatmaja / आत्मज भाव
(c) Saatmyaja / सात्म्यज भाव
(d) Satvaja / सत्त्वज भाव
✅ सही उत्तर: (a) Rasaja / रसज भाव
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, शारीरस्थान 3/33।
QUESTION 53
Match the Following / सुमेलित कीजिए (Dagdha Type with Symptoms):
सूची-I (दग्ध प्रकार)सूची-II (लक्षण)
A. त्वग्दग्ध (Twakdagdha)I. रूक्ष-अरुणता (Ruksha-Arunata)
B. मांसदग्ध (Mamsadagdha)II. कपोत-वर्णता (Kapota-Varnata)
C. सिरा-स्नायु दग्ध (Sira-Snayu)III. शब्दप्रादुर्भाव (Shabdapradurbhava)
D. सन्धिदग्ध (Sandhidagdha)IV. कृष्णोन्नत-व्रणता (Krishnonnata)
(a) A-I, B-III, C-IV, D-II
(b) A-III, B-I, C-II, D-IV
(c) A-III, B-I, C-IV, D-II
(d) A-III, B-II, C-I, D-IV
✅ सही उत्तर: (c) A-III, B-I, C-IV, D-II
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, सूत्रस्थान अध्याय 12 (अग्निकर्म विधि - दग्ध लक्षण)।
QUESTION 54
Match List-I (Virechana Yoga) with List-II (Vyadhi) / विरेचन योग एवं व्याधि:
सूची-I (विरेचन योग)सूची-II (व्याधि)
A. कल्याणक गुड (Kalyanaka Guda)I. प्लीहोदर (Pleehodara)
B. विडङ्गतण्डुलादि चूर्ण (Vidanga)II. विद्रधि (Vidradhi)
C. तिल्वक घृत (Tilvaka Ghrita)III. भगन्दर (Bhagandara)
D. मिश्रक स्नेह (Mishraka Sneha)IV. योनिरोग (Yoniroga)
(a) A-IV, B-III, C-II, D-I
(b) A-II, B-IV, C-I, D-III
(c) A-III, B-I, C-IV, D-II
(d) A-I, B-II, C-III, D-IV
✅ सही उत्तर: (c) A-III, B-I, C-IV, D-II
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, चिकित्सास्थान (विरेचनकल्प योग)।
QUESTION 55
पूरे शरीर में दर्द, प्रमुख जोड़ों में सूजन, भूख न लगना और शिथिलता से पीड़ित एक 35 वर्षीय पुरुष को आमवात का निदान किया गया था। उसका कोष्ठ क्रूर था। उसे क्षीरवस्ति दी गई। इसके बाद रोगी को छाती और वंक्षण क्षेत्र में दर्द के साथ आटोप/पेट फूलना शुरू हो गया। इस स्थिति के प्रबंधन के लिए कौन सा उपचार आदर्श होगा?
(a) Phalavarti with Madana, Kushtha, Sarshapa etc. / मदन, कुष्ठ, सर्षप आदि के साथ फलवर्ति
(b) Nasya with Shirovirechanagana / शिरोविरेचनगण के साथ नस्य
(c) Virechana with Snuhi etc. / स्नुही आदि के साथ विरेचन
(d) Anuvasana with Ghritamanda / घृतमंड के साथ अनुवासन
✅ सही उत्तर: (a) मदन, कुष्ठ, सर्षप आदि के साथ फलवर्ति
📖 संदर्भ: वस्ति व्यापद चिकित्सा (वस्ति अप्रवृत्त होने पर फलवर्ति का प्रयोग प्रशस्त है)।
QUESTION 56
Which of the following conditions is indicated for Brimhana Nasya?
निम्नलिखित में से कौन सी स्थिति बृंहण नस्य के लिए इंगित की गई है?
(a) Galamaya / गलामय
(b) Apasmara / अपस्मार
(c) Suryavarta / सूर्यावर्त
(d) Neelika / नीलिका
✅ सही उत्तर: (c) Suryavarta / सूर्यावर्त
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, चिकित्सास्थान 40 (नस्यविधि - सूर्यावर्त व अर्धावभेदक में वातशामक बृंहण नस्य)।
QUESTION 57
Which of the following ages is unsuitable for Virechana?
निम्नलिखित में से कौन सी आयु विरेचन के लिए अनुपयुक्त/अयोग्य है?
(a) 16 years / 16 वर्ष
(b) 31 years / 31 वर्ष
(c) 51 years / 51 वर्ष
(d) 71 years / 71 वर्ष
✅ सही उत्तर: (d) 71 years / 71 वर्ष
📖 संदर्भ: अष्टांग संग्रह/हृदय (ऊनषोडशवर्षस्य सप्ततेः परतो न च - 16 वर्ष से कम व 70 वर्ष से अधिक आयु में तीक्ष्ण शोधन/विरेचन वर्जित है)।
QUESTION 58
Match List-I (Graha) with List-II (Symptom) / सूची-I (ग्रह) का सूची-II (लक्षण) से मिलान करें:
सूची-I (ग्रह)सूची-II (लक्षण)
A. स्कन्द ग्रह (Skanda)I. कम्पन, हर्षित रोमत्व, स्वेद, चक्षु निर्मीलन
B. पितृ ग्रह (Pitru)II. ऊर्ध्व निरीक्ष्य हसनम्, मध्य विनमनम्
C. नैगमेष ग्रह (Naigamesha)III. हत चलित एकपक्ष नेत्र
D. श्व ग्रह (Shwa Graha)IV. अङ्ग आक्षेप, विक्षेप, शोष-स्तम्भ-विवर्णता, मुष्टि बन्ध
(a) A-I, B-III, C-II, D-IV
(b) A-IV, B-II, C-III, D-I
(c) A-III, B-IV, C-II, D-I
(d) A-IV, B-I, C-II, D-III
✅ सही उत्तर: (c) A-III, B-IV, C-II, D-I
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, उत्तरतंत्र (बालग्रह प्रतिषेध लक्षण)।
QUESTION 59
According to Ashtanga Hridayakara, the symptom "Karna Nasakshi Mardanah" belongs to which of the following Vartmagata Roga?
अष्टांग हृदयकार के अनुसार "कर्ण नासाक्षि मर्दनः" लक्षण निम्नलिखित में से किस वर्त्मगत रोग का है ?
(a) Kricchronmeelana / कृच्छ्रोन्मीलन
(b) Kukoonaka / कुकूणक
(c) Pakshmoparodha / पक्ष्मोपरोध
(d) Sikatavartma / सिकतावर्त्म
✅ सही उत्तर: (b) Kukoonaka / कुकूणक
📖 संदर्भ: अष्टांग हृदय, उत्तरस्थान 9 ("लिशुः कुकूणकेनाक्षिमर्दनं कुरुते भृशम्...")।
QUESTION 60
एक 30 वर्षीय, नवम मास गर्भावस्था की प्राइमीग्रेवीडा गर्भाशय ग्रीवा के पूर्ण डायलेटेशन के साथ प्रसव पीड़ा में है। नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: प्रवाहण शुरू में धीरे और जब गर्भ योनिद्वार तक पहुँच जाये, तब प्रगाढ़तम किया जाना चाहिए।
कथन II: परिचारकों को उसे आवी की अनुपस्थिति में लगातार प्रवाहण करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।
(a) Both Statement I and Statement II are true / कथन I और कथन II दोनों सही हैं
(b) Both Statement I and Statement II are false / कथन I और कथन II दोनों गलत हैं
(c) Statement I is correct but Statement II is false / कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है
(d) Statement I is false but Statement II is correct / कथन I गलत है लेकिन कथन II सही है
✅ सही उत्तर: (c) Statement I is correct but Statement II is false (कथन I सही है लेकिन कथन II गलत है)।
📖 संदर्भ: चरक संहिता, शारीरस्थान 8/40 (अकाले प्रवाहमणेन बधिरं मूकं... विकलमुपजायते - आवी के बिना अकाल प्रवाहण वर्जित है)।
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