Ayushman Ayurveda

Ayushman Ayurveda
Ayushman Ayurveda: Dedicated Digital Platform for BAMS, MS(Ay), Ph.D(AY) AND Ayush Nursing Competitive Preparation

AIAPGET QUESTION PAPER 2026 PART-2


AYUSHMAN AYURVEDA 
Ayushman Ayurveda Official Test Series

AIAPGET - 2026 QUESTION PAPER (SET - 2)

Questions 21 to 40 | Marking Scheme: +4 for Correct, -1 for Incorrect (1/4 Negative Marking), Max Marks: 80

Attempted: 0/20
Correct (+4): 0
Wrong (-1): 0
Live Score: 0 / 80
भाग १: चरक संहिता (Charaka Samhita)
Q. 21
निम्नलिखित में से, आचार्य चरक के अनुसार, कौन-कौन से मांस प्रदोषज विकार हैं?
A. गंडमाला | B. रक्त प्रदर | C. अलजी | D. गुल्म | E. पांडु
(a) केवल A, B, C
(b) केवल B, C, D
(c) केवल D, E
(d) केवल A, C
✅ सही उत्तर: (d) केवल A, C (गंडमाला एवं अलजी मांसप्रदोषज विकार हैं)
📖 संदर्भ: चरक संहिता, सूत्रस्थान 28/13–14 ("अधिमांसार्बुदं कीलं गलशालूकशुण्डिके। पूतिमांसालजीगण्डगण्डमालापचीस्तथा। मांसजाः...")
Q. 22
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: एक रोगी आपके चिकित्सालय में स्मृति एवं बुद्धि नाश व्याधि वृत्तांत के साथ लाया जाता है और आप इसका निदान अपस्मार करते हैं।
कथन II: परिचारक द्वारा बताये लक्षण "स्मृति एवं बुद्धि नाश" चरक के अनुसार अपस्मार के पूर्वरूप हैं।
(a) कथन I और कथन II दोनों ही सत्य हैं।
(b) कथन I और कथन II दोनों ही गलत हैं।
(c) कथन I सत्य है लेकिन कथन II गलत है।
(d) कथन I गलत है लेकिन कथन II सत्य है।
✅ सही उत्तर: (c) कथन I सत्य है लेकिन कथन II गलत है।
📖 संदर्भ: चरक संहिता, निदानस्थान 8 ("अपस्मारं पुनः स्मृतिबुद्धिसत्त्वसंप्लवाद्विभत्सचेष्टमावस्थिकं तमःप्रवेशमाचक्षते" - स्मृति व बुद्धि का संप्लव/नाश अपस्मार का लक्षण/स्वरूप है, पूर्वरूप नहीं)।
Q. 23
एक महिला ने सामान्य प्रसव द्वारा एक बच्चे को जन्म दिया है। निम्न में से कौन सी परिचर्या सूतिकाकाल में उपयुक्त है?
A. उदर अभ्यंग | B. पिप्पली सिद्ध यवागू | C. परिषेक | D. आस्थापन बस्ति | E. विरेचन
(a) केवल A, B एवं C
(b) केवल B, C एवं D
(c) केवल D एवं E
(d) केवल A एवं C
✅ सही उत्तर: (a) केवल A, B एवं C
📖 संदर्भ: चरक संहिता, शारीरस्थान 8/48 (सूतिका परिचर्या में स्नेह अभ्यंग, उष्णोदक परिषेक तथा पिप्पल्यादि सिद्ध यवागू का विधान है)।
Q. 24
सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए (संकेत एवं विकार):
सूची-I (संकेत)सूची-II (विकार)
A. स्तब्धमुदरमाततम्I. उपविष्टक
B. प्राप्तात्परिमाणादपरिहीयमानII. लीनगर्भ
C. प्रसुप्तो न स्पन्दतेIII. मूढगर्भ
D. गर्भकोशपरासंगIV. मृतगर्भ
(a) A-III, B-II, C-I, D-IV
(b) A-IV, B-II, C-I, D-III
(c) A-II, B-IV, C-III, D-I
(d) A-IV, B-I, C-II, D-III
✅ सही उत्तर: (d) A-IV, B-I, C-II, D-III
📖 संदर्भ: चरक संहिता, शारीरस्थान 8 (गर्भ व्याधि लक्षण)।
Q. 25
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: मधुर-अम्ल-लवण रस बद्धविण्मूत्रमारुत के लिए उत्तरदायी होते हैं।
कथन II: कटु-तिक्त-कषाय रस सृष्टविण्मूत्रमारुत के लिए उत्तरदायी होते हैं।
(a) कथन I और कथन II दोनों ही सत्य हैं।
(b) कथन I और कथन II दोनों ही गलत हैं।
(c) कथन I सत्य है लेकिन कथन II गलत है।
(d) कथन I गलत है लेकिन कथन II सत्य है।
✅ सही उत्तर: (b) कथन I और कथन II दोनों ही गलत हैं।
📖 संदर्भ: चरक संहिता, सूत्रस्थान 26 (मधुर, अम्ल, लवण रस सृष्टविण्मूत्रमारुत होते हैं तथा कटु, तिक्त, कषाय रस बद्धविण्मूत्रमारुत होते हैं; यहाँ दोनों कथन उल्टे दिए गए हैं)।
Q. 26
नीचे दो कथन दिए गए हैं (अभिकथन A और तर्क R):
अभिकथन (A): चरक के अनुसार "वैरस्य" वातज स्तन्य दुष्टि है।
तर्क (R): बच्चे का स्वर क्षाम होगा, शिरः शूल, और पीनस हो जायेगा यदि वह लगातार वात दुष्ट स्तन्य का सेवन करता रहेगा।
(a) A और R दोनों सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(b) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(c) A सही है लेकिन R सही नहीं है।
(d) A सही नहीं है लेकिन R सही है।
✅ सही उत्तर: (b) A और R दोनों सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
📖 संदर्भ: चरक संहिता, चिकित्सास्थान 30/234–240 (वैरस्य वातज स्तन्य दुष्टि है तथा वातदुष्ट स्तन्यपान से स्वरक्षामता व पीनस होता है, दोनों स्वतंत्र रूप से सत्य हैं)।
Q. 27
स्तन्यक्षय से पीड़ित 2 महीने के बच्चे की माँ ने अपने स्तन्य को बढ़ाने के लिए शतावरी, षष्ठिक चावल, घी और सूखे मेवे लेना शुरू कर दिया। एक माह के बाद स्तन्य तो ठीक हो गया परन्तु उसके शिशु को अत्यधिक लार, आंखों में सूजन और शरीर में सुस्ती होने लगी। बच्चे को यह होने का क्या कारण हो सकता है?
(a) क्षार दूषित स्तन्यपान के कारण।
(b) पित्त दूषित स्तन्यपान के कारण।
(c) घन दूषित स्तन्यपान के कारण।
(d) कफ दूषित स्तन्यपान के कारण।
✅ सही उत्तर: (d) कफ दूषित स्तन्यपान के कारण।
📖 संदर्भ: चरक संहिता, चिकित्सास्थान 30/252–254 (गुरु, मधुर व स्निग्ध आहार से कफज स्तन्य दुष्टि होती है, जिससे शिशु में प्रसेक, मुख-नेत्र शोफ व तन्द्रा/आलस्य उत्पन्न होता है)।
Q. 28
"व्यंजन" शब्द का पर्याय/अर्थ क्या है?
(a) रूप
(b) निदान
(c) पूर्वरूप
(d) संप्राप्ति
✅ सही उत्तर: (a) रूप
📖 संदर्भ: चरक संहिता, निदानस्थान 1/9 ("तत्र लिङ्गं लक्षणं चिह्नं संस्थानं व्यञ्जनं रूपं...")।
Q. 29
'अलौल्य' से निम्नलिखित में से किसका अनुमान लगाया जाएगा?
(a) मेधा
(b) धी
(c) धृति
(d) धैर्य
✅ सही उत्तर: (c) धृति
📖 संदर्भ: चरक संहिता, विमानस्थान 4/8 ("धृतिम् अलौल्येन [अनुमिमीते]")।
Q. 30
नीचे दो कथन दिए गए हैं (अभिकथन A और तर्क R):
अभिकथन A: ज्वर में पाचन के लिए उष्णजल का उपयोग किया जाता है।
तर्क R: आमाशयसमुत्थ व्याधि को ठीक करने वाली दवाएं आम तौर पर पाचन गुण वाली होती हैं।
(a) A और R दोनों ही सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
(b) A और R दोनों ही सही हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है।
(c) A सही है लेकिन R गलत है।
(d) A गलत है लेकिन R सत्य है।
✅ सही उत्तर: (a) A और R दोनों ही सही हैं और R, A की सही व्याख्या है।
📖 संदर्भ: चरक संहिता, चिकित्सास्थान 3/142–144 (ज्वर आमाशयसमुत्थ है, अतः उष्णजल आमाशयगत आमदोष का दीपन-पाचन करता है)।
Q. 31
चरक ने "लशुनाद्यघृत" को निम्न में से किस व्याधि में इंगित किया है?
(a) उन्माद
(b) गुल्म
(c) शोथ
(d) कुष्ठ
✅ सही उत्तर: (a) उन्माद
📖 संदर्भ: चरक संहिता, चिकित्सास्थान 9/50–55 (उन्माद चिकित्सा में लशुनाद्य घृत का वर्णन है)।
Q. 32
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: वातज प्रमेह असाध्य है।
कथन II: वातज प्रमेह "संसृष्टदोष मेदः स्थानत्वात्" के कारण असाध्य है।
(a) कथन I और कथन II दोनों सही हैं।
(b) कथन I और कथन II दोनों गलत हैं।
(c) कथन I सही है, लेकिन कथन II गलत है।
(d) कथन I गलत है, लेकिन कथन II सही है।
✅ सही उत्तर: (c) कथन I सही है, लेकिन कथन II गलत है।
📖 संदर्भ: चरक संहिता, निदानस्थान 4/37 (वातज प्रमेह महात्ययिकत्वात् एवं विरुद्धोपक्रमत्वात् असाध्य होते हैं; संसृष्टदोष/मेदःस्थान पित्तज के लिए आता है)।
Q. 33
स्नेहन, शोधन के पूर्व सूक्ष्म स्रोतस में प्रवेश कर अशुद्धियों को तरल करता है। इस पृष्ठभूमि में स्नेहन द्रव्य के गुणों का सबसे उपयुक्त सेट बनाएं:
A. स्निग्ध | B. गुरु | C. स्थूल | D. बहल | E. सूक्ष्म | F. स्थिर | G. द्रव | H. सर
(a) A, B, C, D, E
(b) A, B, D, F, H
(c) A, B, D, E, F
(d) A, B, E, G, H
✅ सही उत्तर: (d) A, B, E, G, H (स्निग्ध, गुरु, सूक्ष्म, द्रव, सर)
📖 संदर्भ: चरक संहिता, सूत्रस्थान 22/10 ("गुरुशीतमृदुस्निग्धद्रवसूक्ष्मसरद्रवाः। औषधाः स्नेहने...")।
Q. 34
नीचे दो कथन दिए गए हैं (अभिकथन A और तर्क R):
अभिकथन (A): दोषों का शोधन, यह कुष्ठ व्याधि की प्रमुख चिकित्सा है तथा रक्तमोक्षण यह विसर्प की प्रमुख चिकित्सा है।
तर्क (R): दोनों ही रक्तप्रदोषज विकार हैं।
(a) दोनों (A) और (R) सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) दोनों (A) और (R) सत्य हैं लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सत्य है, लेकिन (R) असत्य है।
(d) (A) असत्य है, लेकिन (R) सत्य है।
✅ सही उत्तर: (b) दोनों (A) और (R) सत्य हैं लेकिन (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
📖 संदर्भ: चरक सूत्रस्थान 28/11–13 (कुष्ठ एवं विसर्प रक्तप्रदोषज हैं; कुष्ठ बहुदोषज होने से वमन-विरेचन आदि बार-बार शोधन साध्य है, जबकि विसर्प में आशुकारित्व के कारण रक्तमोक्षण प्रधान है)।
Q. 35
निम्नलिखित में से कौन-सा ज्वर दो दिन के अन्तराल पर होता है?
(a) सतत् ज्वर
(b) अन्येद्युष्क ज्वर
(c) तृतीयक ज्वर
(d) चतुर्थक ज्वर
✅ सही उत्तर: (d) चतुर्थक ज्वर (दो दिन छोड़कर चौथे दिन आने वाला ज्वर)
📖 संदर्भ: चरक संहिता, चिकित्सास्थान 3/69–73 ("द्व्यन्तरः चतुर्थकः")।
भाग २: सुश्रुत संहिता (Sushruta Samhita)
Q. 36
आचार्य सुश्रुत के अनुसार, मधुमेह के लिए श्रेष्ठ रसायन है:
(a) गुडमार
(b) शिलाजीत
(c) अश्वगंधा
(d) अभ्रक
✅ सही उत्तर: (b) शिलाजीत
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, चिकित्सास्थान 13 (शिलाजतु रसायन)।
Q. 37
निम्न में से क्या आर्तव दुष्टि चिकित्सा में सही है?
A. पूयदोष में परूषक एवं वट | B. ग्रंथिभूत में चन्दन एवं पाठा | C. कुणपदोष में धातकी पुष्प, खदिर, दाडिम एवं अर्जुन | D. क्षीणदोष में अश्वगन्धा एवं उशीर | E. वातदोष में शतावरी एवं विदारी
(a) केवल A, B एवं C
(b) केवल B, C एवं D
(c) केवल D एवं E
(d) केवल A एवं C
✅ सही उत्तर: (d) केवल A एवं C
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, शारीरस्थान 2/20–24 (आर्तवदुष्टि चिकित्सा)।
Q. 38
सुश्रुत ने निम्नलिखित में से किस स्वेदन को मुख्यतः वातहर कहा है?
(a) ताप
(b) उपनाह
(c) ऊष्म
(d) द्रव
✅ सही उत्तर: (b) उपनाह
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, चिकित्सास्थान 32/11 ("उपनाहस्तु वाते प्रदिष्टः...")।
Q. 39
हनु अस्थि में स्थित ग्रंथि जो स्थिर, वृत्तआयत, स्निग्ध, अल्प रुजा, और आमलकी बीज स्वरूप होती है उसे कहते हैं:
(a) पित्तज ग्रन्थि
(b) कफज ग्रन्थि
(c) अपची
(d) वातिक ग्रन्थि
✅ सही उत्तर: (c) अपची
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, निदानस्थान 11/10 ("हन्वस्थिसन्धिगलादिषु... आमलकास्थिमात्राः... अपचीति विद्यात्")।
Q. 40
नीचे दो कथन दिए गए हैं:
कथन I: सुश्रुत के अनुसार, सम्यग्दग्ध में पित्तविसर्पवत् चिकित्सा की जाती है।
कथन II: सुश्रुत के अनुसार, प्लुष्टदग्ध में शीत चिकित्सा की जाती है।
(a) कथन I और कथन II दोनों सही हैं।
(b) कथन I और कथन II दोनों गलत हैं।
(c) कथन I सही है, लेकिन कथन II गलत है।
(d) कथन I गलत है, लेकिन कथन II सही है।
✅ सही उत्तर: (b) कथन I और कथन II दोनों गलत हैं।
📖 संदर्भ: सुश्रुत संहिता, सूत्रस्थान 12/20–24 (प्लुष्टदग्ध में अग्नितापेन उपशमन यानी उष्ण क्रिया की जाती है और दुर्दग्ध में शीत व उष्ण दोनों, तथा सम्यग्दग्ध में तूतकादि तैल/शीत लेप किया जाता है; अतः दोनों कथन गलत हैं)।
Previous
Next Post »

Ayushman Ayurveda

Ayushman Ayurveda
Call for Free Ano-Rectal Consultation - 9461867078 (https://ayushman-ayurveda.business.site/?utm_source=gmb&utm_medium=referral)